शनिवार, 8 अक्टूबर 2011

फिर एक बार सुदामा ...!

फिर एक बार सुदामा
अपने चावल लेकर
आ पहुंचा द्वारका ..

उसका नगर देखकर दांग रहना
लोगोंका उसपर हँसना 
बिलकुल वैसाही जैसे पहले हुआ था ..
वह दरबारमें आया ,
सिंघासन पर कृष्ण था ही नहीं..;
मदांध सत्ता का 
जहरीला पुत्र -अहंकार बैठा था..
बचा था तो सिर्फ कालयवन की क्रूरता  और 
कालिया का कालकूट जहर..!

अब वो देखो वहां 
सुदामा पड़ा है 
अहंकारसे लात खाकर
उस कोने में .
और अपनेही चावल खा रहा हैं,
अपने ही आसुओंके साथ.......!
-----संजय बोरुडे .  

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